वर्तमान में साइंस के बढ़ते कदमों की मदद से हर व्यक्ति पत्रकार हैं।सस्ते इंटरनेट ने इस चलन को और बढ़ा दिया है।जिस किसी को भी जहाँ भी खबर दिखती है, वह उसे अपने मोबाइल की मदद से शूट करके सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकता हैं।ऐसी कई खबरें होती हैं, जो आपको मुख्यधारा की मीडिया में नहीं दिखाई पड़ती हैं।लेकिन हम सिटिज़न जर्नलिस्ट की स्टोरी को देख सकते है।इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि बड़े बड़े चैनल अब सिटीजन जर्नलिस्ट को मौका दे रहे हैं।जिस तरह से सिटीजन जर्नलिस्टो ने कोरोना काल में काम किया है उससे इन्हें और अधिक बल मिला है।इनके द्वारा किस तरह से सरकारी तंत्र में लापरवाही चल रही हैं, उसको उजागर किया।इस दौरान ऑक्सीजन संकट कहीं न कहीं मरीजों की जान ले रहा था,जिसकी वजह से सैकड़ों लोगों की जान चली गई।सरकार की इस घोर लापरवाही को जनता के सामने उजागर करने में नागरिक पत्रकारिता ने अहम योगदान अदा किया।ऑक्सीजन से लेकर शमशान में जल रहीं चिताओं को जिस तरह से कवर किया,उसने सरकार को कठघरे में खड़ा किया और मजबूर किया कि सही आंकड़े पेश करे।नागरिक पत्रिकारिता को डिजिटल मीडिया ने मुख्य धारा की मीडिया के बाद लाकर खड़ा कर दिया है।सही मायने में नागरिक पत्रिकारिता आम आदमी की आजादी है।आम आदमी की अनेक कहानिया ऐसी होती हैं जो परिवर्तन का रास्ता सुनिश्चित करती हैं।देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों में नागरिक पत्रिकारिता के लिए स्थितियाँ अनुकूल हुई हैं।