लोकसभा चुनाव होने में अब सिर्फ 3 महीने का समय रह गया हैं, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर अभी तक स्थिति साफ नहीं हुई हैं।
ममता ने दिखाए तल्ख़ तेवर:
लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए विपक्षी गठबंधन बिखरा हुआ नज़र आने लगा है।जिसकी वजह से कांग्रेस पार्टी की घटक दलों के साथ समन्वय करने की रणनीति को झटका लगा है, साथ ही ‘इंडिया’ गठबंधन में दरार की संभावना स्पष्ट है।इसी कड़ी में ममता दीदी ने कहा हैं कि उन्होंने राज्य में अकेले लड़ने का फैसला किया है,लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के सदस्य के तौर पर उनकी पार्टी बनी रहेगी।
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अधीर रंजन का ‘ममता’ पर निशाना:
बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने के ममता बनर्जी के फैसले पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा,’ममता अवसरवादी नेता हैं’ इसके साथ ही उन्होंने ममता को 2011 में बंगाल का मुख्यमंत्री बनाने में कांग्रेस की कृपा का ज़िक्र किया और दावा किया कि कांग्रेस पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का दम रखती हैं, पार्टी किसी की कृपा पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
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पंजाब में ‘आप’ को हाथ का साथ नामंजूर:
विपक्षी एकता गठबंधन(इंडिया) में कांग्रेस की घटक दलों के साथ सब कुछ सही वाली स्थिति को तब और झटका लगा जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य की 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने, साथ ही जीतने का दावा करने के बाद आम आदमी पार्टी ने भी साफ़ संकेत दे दिए हैं कि राज्य और राष्ट्रीय गठबंधन में अंतर रहेगा।
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गठबंधन में ‘दरार’ पर पर भाजपा का तंज:
बंगाल में ममता के अकेले लड़ने के एलान के बाद भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तंज कसते हुए कहा, यह विपक्षी गठबंधन के अंत का संकेत हैं।इसके साथ ही उन्होंने ममता पर आरोप लगाया कि बंगाल में अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए सभी सीटों पर लड़ना चाहती हैं और उन्हें एहसास हो गया है कि विपक्षी गठबंधन में उनका कोई भाव नहीं हैं।