एक आशियाना ऐसा भी जिसमें दर्द और खुशी दोनो ही साथ रहते हैं, हम बात कर रहे हैं कृष्ण की नगरी वृन्दावन की ।जो सारे विश्व में प्रख्यात है कृष्ण की लीलाओं के लिए,लेकिन इसी नगर में एक ऐसा स्थान भी हैं जहाँ आकर दर्द भी खुशी से झूम उठता हैं और कहता हैं राधे-राधे ।। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता हैं वृन्दावन के विधवा आश्रमों में,जहाँ किसी को परिवार ने छोड़ा तो कोई परिवार को छोड़ कर आया और कृष्ण भक्ति में लीन हो गया। वृन्दावन में आने पर आपको यहाँ की गली- मोहल्लों, L s, और चौराहों पर भजन- कीर्तन में लीन सफ़ेद कपड़ा धारण किये हुए कई विधवा माता देखने को मिलेंगी। ऐसे ही हम भी पहुँचे एक विधवा आश्रम जिसमें हमारी मुलाकात अनेकों माता -बहनों से हुई ,उनमें से ही एक थी पश्चिम बंगाल की रहने वाली मनु घोष।जिन्होंने हमें बताया कि इस आश्रम में उनकी क्या दिनचर्या रहती हैं, कैसे सभी महिलाएं एक साथ मिल जुल कर रहती हैं।इस आश्रम में कई माताओं से बातचीत करने के दौरान हमें कुछ रोचक बातें जानने को मिली।। हर साल रक्षा बंधन का पर्व मनाने इनमें से कुछ माताए प्रधानमंत्री आवास पर जाकर देश के प्रधानमंत्री को रक्षा सूत्र का धागा बाँधती हैं।। यहाँ के एक व्यक्ति ने हमें बताया कि दुनिया की जानी -मानी टॉक शो करने वाली ओपरा विनफ़्रे ने भी अपनी एक लघु फ़िल्म यहाँ शूट की थी।। अंत में जब हमें पता चला कि इन सभी माताओं के लिए आश्रम में ही स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराएं जाते हैं, जिसमे मंदिरों में चढ़ावे के रूप में आने वाले फूलों से अगरबत्तियां बनाने का कार्य किया जाता हैं और इन सब में मदद करती है यहाँ के कुछ फाउंडेशन।